एक पल का अनोखा प्यार


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1

"चलो यार खाना खा कर रूम पर चलते हैं वरना गेट बंद हो जाएगा" मै अपने लेदर जैकेट के बाजू में से अपने घड़ी को देखते हुए कहा, जिसमे रात के 9:52 हो रहे थे। यह मेरी वही rolex घड़ी थी जिसे मेरे 10th में 1st आने पर पापा जी ने दिया था और जिसे मैं बहुत ही संभाल कर रखता था आज पार्टी में आते समय सोचा कि डाल लेता हूँ, सायद थोड़ा impression बढ़ जाएगा।
"ओके...... तो फिर चलें" जय ने हम दोनों को देखते हुवे बोला। "कहाँ ?" प्रकाश पूरी तरह घबड़ा कर बोला अभी तो हम लोग खाना भी नही खाए ...
"तो वहीं तो जा रहे हैं" जय ने हँसते हुए कहा और फिर हम तीनों चल दिए।
थोड़ी सी दूरी पर एक महाशय ब्लैक लेदर जैकेट और ब्लैक कैप पहने हुवे सैक्सोफोन बजा रहे थे, पहले तो मुझे लगा कि शायद टेप रिकॉर्डिंग चला कर ये हमे बेवकूफ बना रहा है मगर कुछ ही दी में ये भ्रम भी टूट गया। सैक्सोफोन की ध्वनि मुझे ऐसे लग रही थी जैसे संसद में विपक्ष वाले सोर मचा रहे हों, और ऐसा होना लाजमी था.... एक तो सर्दी की रात और उसी पर हवा भी तेज होती जा रही थी। ठंडे हवाओं के झोंके चेहरे को बर्फ की तरह छू रहे थे सर्दी धीरे धीरे ऐसे बढ़ती जा रही थी जैसे मानो देश मे भ्रष्टाचार! मैं खाना जैसे तैसे खत्म ही कर चुका था और थाली को डस्टविन में रखने के लिए ले ही जा रहा था कि मेरी नजर एक हसीना पर जा पड़ी..... हाए! चमकती कत्थई सी आँखे, सेब से चमकते लाल गाल दूध सा श्वेत चेहरा उसपर लाल सुर्ख होठ ऐसे प्रतीत हो रहा था जैसे अप्सरा! कद 5 फुट 7 इंच लाल घुटने से नीचे तक लटकता कमीज़ उसे सुंदरता को ऐसे बढ़ा रहा था जैसे airtel अपने data पैक को
मै जैसे तैसे अपना हाथ धोकर बाल फेरते हुवे आगे बढ़ रहा था "कहाँ जा रहे हो रूम पर नही चलना " जय ने पूछा। रुको एक सेकेण्ड... , मै उसकी ओर देखते हुवे ही बोल दिया। उस समय मुझे सैक्सोफोन की बिरान और पकाऊ ध्वनि सुगम और मोहक लग रही थी, सर्दी भी बिल्कुल महसूस नही हो रही थी।
"Excuse me...." उसने होठों पर मन्द मन्द मुस्कान लिए हुवे कहा,"पनीर का  counter किधर है"
ब.. बगल में वहां पर, मैंने उंगली से इशारा करते हुए कहा
"आपने खाना खा लिया" अभी भी उसके चेहरे पर मुस्कान ऐसे बिखर रहे थे जिसे पानी में तरंग उमड़ रहे हो
जी नही.... मैं जैसे हाँ बोलने वाला था मगर अब अपनी बात से पलट भी नहीं सकता था। मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे किसी ने पूरे शरीर में एक ही बार में कई सौ वोल्ट के करेंट छोड़ दिया हों।
तो चलिए की खाना नहीं खाइएगा ? उसने आँखों में आँखे डाल कर मुस्कुराते हुवे ही पूछा
चलिए, मैने उसके साथ चल दिया
मैं पहली बार किसी लड़की के साथ बात कर रहा था मेरे पैर और हाथ दोनों कांप रहे थे बर्फ जैसी चल रही हवाओं में भी मुझे पसीना हो रहा था
इतना प्रेशर तो 10th के exam में भी बैठ कर नही हुआ था।
हम दोनों ने खाने का प्लेट लिया,  "चलीए वहाँ पर बैठ कर खाते हैं "मैंने एक गोलाकार टेबल की ओर इशारा करते हुए कहा।
मैं खाना लगभग खत्म कर चुके था और उसकी थाली में अभी एक तिहाई खाना बचा था। sorry मुझे जल्दी खाने की आदत है, मैंने भी उसकी आँखों मे आँखे डालने की कोशिस करते हुए कहा। मगर मेरी ये कोशिस कामयाब नही रही परन्तु उसे पता चल गया कि मैं क्या करना चाहता हूँ
अच्छा जा रहा था, कह कर उसने जोर से खिलखिला दिया
अरे तुम यहाँ क्या कर रहे हो हमने तुम्हे कहाँ कहाँ नही ढूंढा, कंधे पर थपथपाते हुवे जय ने पूछा और मुझे पकड़ कर ले जाने लगा अचानक मेरा हाथ उसकी ओर बढ़ा उसने भी अपना हाथ मेरी ओर बढ़ाया मगर अफ़सोस हम एक दूसरे को छू भी नही सके
तुम्हारा पेट अभी नही भरा था क्या जो फिर से खा रहे थे, उसने मझे प्रकाश की ओर ढ़केला
नही यार उसने मुझे बुलाया था, मैंने अपने आपको कोसते हुवे कहा
किसने ? प्रकाश ने आश्चर्य भरे स्वर में कहा।
उसी ने मुझे उसका नाम नहीं मालूम, मैने खीज कर कहा। तभी मुझे अचानक  याद आया कि मैंने उसका नाम भी नही पूछा था मैं उनको झटक कर उस टेबल की ओर भागा मगर अफसोस वहाँ पर कोई नहीं था
मेरी प्रेम कहानी अधूरी रह गई।

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