एक पल का अनोखा प्यार



Series 3


हाँ अभी आया ! मैने कहा, मेरी आवाज में जरूरत से ज्यादा चिड़चिड़ाहट थी और हो भी क्यों नही,  आज मेरा बर्थडे जो था और उसी पर सुबह से ही काम। दर असल मेरे जन्मदिन पर मेरे घर वालों की तरफ से दान पुण्य का काम चलता है मेरी लम्बी उम्र की सलामती के लिए । मेरी नजर बंगले पर लगी पुरानी दोलन घड़ी पर पड़ी तो ऐसे चल रही थी जैसे देश में सरकार सुबह हुवे मानो एक अरसा हो चुका था मगर घड़ी में शाम के 5:34 ही हो रहे थे और अभी तक मैं नहाया भी नही था। बात ऐसी थी कि दान देने का रश्म नहाने के बाद ही शुरू हुआ था मगर तब तक मुझे दुबारा नहाना पड़ सकता था मेरी हालत ऐसी हो गई थी।
मैं अब जल्दी जल्दी में घर को निकलने ही वाला था कि दाढ़ी और बाल बढ़ाए 5 साधुओं का ग्रुप सामने से चला आया ! दर असल ओ हमारे कुल गुरु और उनके कुछ चेले थे।
"बाबू! ,बाबू! " पिता जी ने उनके पैर छुते हुवे मुझे बुलाया "गुरु जी आगए आशीर्वाद लो"
वैसे मैं भी गुरुवों और ब्राम्हणों का बहुत कद्र करता हूँ मगर उस दिन मुझे कुछ सूझ नही रहा था।
यशस्वी भवः! गुरु जी ने मेरे सिर पर हाथ रखते हुए बोला। कैसे हो
सब आपकी कृपा है गुरु जी, मैने कहा
गुरु जी के पैर धो दो! मैन देखा पिता जी के हाथ मे एक सोने से चमकते पीतल के गमले में पानी था
मैन उनके पैर पखारे और घर को चल दिया।
हल्की हल्की बारिश की बूंदे ऐसे गिर रही थीं जैसे डॉलर के मुकाबले इंडियन करैंसी की भाव।
वर्षा ऐसी थी कि कोई भीग नही सकता था मगर पूरी तरह सूखा भी नहीं रह सकता।मेरे कुछ कुछ मित्र छोटे छोटे ग्रुप में जगह जगह खड़े होकर आपस मे बातें कर रहे थे। कुछ तो बिल्कुल नराज भी थे ,क्योंकि जन्मोत्सव बिहार में ही मनाया जा रहा था और बिहार में नशा मुक्ति अभियान चल रहा है।
मैने अपनी कलाई घड़ी की ओर नजर दौड़ाई तो उसमें 7:49PM हो रहे थे।
बाबू! ये आवाज भी पिता जी की थी।
हाँ।
इधर आओ।
क्या है।
इनसे मिलो ,ये हमारे बिज़नेस पार्टनर हैं । मिस्टर राठौड़।
मेरी आँखें खुली की खुली रह गई........
उनको देख कर नही , उनके साथ एक राजकुमारी थी उसको देख कर।
सायद मैने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसी लड़की नही देखी थी।
रंग मिल्की व्हाइट, लाल सुर्ख होठ, आँखों की पकें इतनी कड़ी थी जैसे तलवार। श्वेत फ्रॉक शूट पर मोदी जी द्वारा दिया गया led लाइट चमकता था तो मानो बिल्कुल अप्सरा लग रही थी।
ये मेरी इकलौती बेटी है , राठौड़ जी ने उसकी ओर इशारा करते हुवे कहा।
Hello! उसने अपना हाथ आगे निकालते हुए कहा।उसकी झंकार भरी hello की आवाज मेरे कानों में गूँज रहे थे ।ऐसा लग रहा था जैसे बिल्कुल शांत माहौल में कोई वीणा के तारों को छेड़ दिया हो। उसके इस आवाज के बाद मेरे आस पास का माहौल इतना शांत हो गया जैसे कोई सांस भी ले तो बादल की गड़गड़ाहट जैसा प्रतीत हो।
मैने भी अपना हाथ बढ़ाया , उसके छुते ही ऐसा लगा जैसे पूरे शरीर मे 11000v का करेंट घूम गया हो। उस समय जिस प्रकार का अनुभव मैने महशुस किया उसे मैं शायद शब्दों में ब्यक्त नही कर सकता। मगर इतना जरूर बता सकता हूँ कि वैसी अनुभूति पूरे लाइफ में पहली मर्तवा हुई थी।
"आपका नाम" उसने पूछा ऐसा लगा वीणा को किसी ने दुबारा छेड दिया हो।
ब. बाबू। मैने लड़खड़ाती जुबान में कहा और ऐसा होना भी लाजमी था क्योंकि कोई लड़की पहली बार मुझसे बात कर रही थी।

आपने मेरा नाम नही पूछा, क्यों ? उसने कहाँ 
मैंने कहा। "बस यूँ ही"  

मेरी समझ से किसी से प्यार होने के लिए या किसी को पसंद करने के लिए उसका नाम , जाती, और पिता का कारोबार पूछना बिल्कुल फालतू की बात है।
अगर सामने वाले का नाम, पिता का कारोबार, जाती, और बैकग्राउण्ड जानने के बाद आपको लगता है कि आपको प्यार हो गया तो ओ सिर्फ एक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कीसी से किया गया खिलवाड़ मात्र होगा ।

कुछ देर बाद हमलोग अकेले में हो गए थे। मैं उससे कुछ कहना चाहता था दर असल बातों का सिलसिला अपना रुख बदल चुका था।
आपको किस तरह की लड़की पसंद है उसने अपने होठों पर मन्द मन्द मुस्कान लिए हुए बोला।
आप जैसी! 
क्या?
म. मेरा मतलब आप लोग जैसी भी लड़की पसंद कर के शादी करा दें। मैंने अपनी बातों को बदलते हुए कहा!
एक बात बोलें,  उसने कहा।
मैंने झट से उसके चेहरे की ओर देखा , उसकी चमकती आँखों मे हल्की नमी सी थी होठ कपकपा रहे थे मानो कोई बात हो जो हलक से बाहर तो आनी चाहती हो मगर जुबान आज्ञा न दे रहा है। आवाज में गंभीरता थी।

हाँ! मैन बिल्कुल धीरे से कहा।
I love you, इतना कह कर ओ मेरी आँखों मे देखने लगी।
सायद उसे फर्स्ट साइड लव हो गया था। मगर ये हवा केवल उधर से ही नही चली थी, मेरे दिल मे भी तूफान उठ चुके थे जी चाहता था कि वहीं गले से लगा कर इतनी जोर से चिल्लाकर i love you to बोलूं की वहाँ पर उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को ये बात सुनाई दे।
बेटा! मैंने पलट कर देखा उसके पिता जी थे , अब हमें चलना चाहिए रात बहुत हो चुकी है।
ओ चेयर से उठी और जाने लगी मगर उसकी आँखों मे आँसु के बून्द मुझे साफ दिखाई दे रहे थे, जी हो रहा था दौड़ कर उसकी हाथों को थम्भ लूँ मगर ऐसा नही हो सका धीरे धीरे देखते ही देखते ओ मेरी आँखों से ओझल हो गई।
फिर क्या पूरी रात यही सोचता रहा कि काश उसका नाम पूछ लिया होता।

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