हॉल लोगों से खचाखच भरा हुआ था जैसे मुम्बई की लोकल ट्रेन। "किनारे होकर बैठ जाइए" एक बृद्ध महिला ने मुझे टकरा कर ऐसे घूरते हुए कहा जैसे मानो जब से उसके बाल सफेद होने सुरु हुवे हो तब से उसने मुस्कुराया ही नही। मैं उसकी ओर देखते हुवे एक सोफे पर जा बैठा मेरे बगल में एक और लड़का पहले से ही बैठा था ,राघव ।
राघव मेरे relation में का लड़का था और ओ मुझे पहचानता भी था। हम लोगों से कुछ ही दूरी पर कुछ लड़के मंण्डप बांध रहे थे, सायद हॉल भी उसी कारण इतना भरा हुवा था। "बैठो यार कहाँ जा रहे हो" मैं उठ कर चलने ही वाला था कि राघव ने मेरा हाथ खिंचते हुवे कहा, मैं चुप चाप फिर वहीं बैठ गया।
आस पास कुछ लड़कियाँ सज संवर रहीं थीं। बरात आने में कुछ समय था , जैसे कि आप लोगों को पता ही होगा कि बिहार, उत्तरप्रदेश और इसके आस पास केइलाकों में दूल्हा बारात लेकर देर रात तक ही आता है।
कुछ ही देर में मेरी नजर एक लड़की से जा मिली जो बाल कम बना रही थी और मुझे ज्यादा देख रही थी।
काली बड़ी आँखे, कमर से नीचे तक लटकते बाल, रंग हल्का साँवला
ऊँचाई लगभग 5 फिट 4 इंच । लाल लहंगा चुन्नी में बिल्कुल रोंगटे खड़े कर देने वाली प्रतीत हो रही थी।
"उस लड़की को देख रहे हो ओ कभी से मुझे देख रही है" राघव ने मुझसे मुस्कुराते हुवे कहा। उसकी मुस्कान में एक अजीब प्रकार का उत्साह उमड़ रहा था, क्यों न उमड़े ओ उसे देख जो रही थी। मैं उस समय प्यार के मामले में pre nursery में था so मुझे क्या पता जब कोई लड़की किसी लड़के को देखती है तो कैसा feel होता है।
क,क.. कौन लड़की, मैने पूछा
ओ लाल लहंगे वाली! उसने इशारा करते हुए कहा, उससे मेरी शादी तय होने वाली है।
शादी? मैंने उसको आश्चर्य से देखते हुए कहा।
हाँ! क्यों?
उससे शादी मत करना।
पर क्यों?
बस यूँ ही। मै अब उससे ये कैसे बताता की ओ लड़की तो कभी से मुझे देख रही है, और मैं उसको ये बात बता कर उसके उत्साह से चमक रहे चेहरे पर उदासी के बादल नहीं देखना चाहता था।
"क्या मैं यहां बैठ सकती हूँ" एक लड़की ने मेरे सामने लगे कुर्सी पर हाथ रख कर कहा।
हाँ बिल्कुल! ये आवाज राघव और मेरे दोनों लोगों के थे। मैं राघव की ओर देख रहा था और ओ मेरी ओर तभी अचानक ओ लड़की खिलखिला दी। "होता है" उस लड़की ने कहा। दरअसल ये लड़की कोई और नही वही लड़की थी जिसकी हम दोनों बात कर रहे थे।
कुछ ही देर में राज वहीं पर आकर बैठ गया। राज, राघव और वो लड़की तीनो आपस में बात कर रहे थे मगर उस लड़की का ज्यादा तर ध्यान मुझपर था।
अगर कोई लड़की मैकप में हो और आप उसे इग्नोर करोगे तो ओ आपसे ज्यादा किसी और से नही चिड़ेगी।
जब आप किसी से प्यार नही भी कर रहे होते हैं मगर कोई आपको बेशब्री से आपको चाहे तो आपको भी प्यार हो ही जाएगा और प्यार होने में वक्त ही कितना लगता है।
द्वार पूजा के समय ओ डायरेक्टली मेरे पास आई मेरे से कुछ ही दूरी पर मेरे पिता जी खड़े थे मगर इतना कोलाहल में कौन किसको देख रहा है, और इसी बात का फायदा उठाकर ओ मेरे पास आयी थी
"मैं कभी से तुम्हे देख रहीं हूँ" उसने गुस्से में कहा तुम अपने आप को समझते क्या हो , तुम्हे लगता है कि यहां पर एक तुम ही हो जो मैं तुम्हारे पीछे पड़ी रहूँ । अगर तुम ऐसा समझते हो तो बिल्कुल ठीक समझते हो। इतना कह कर ओ मुझसे लिपट गई और रोने लगी। मुझे कुछ समझ में नही आ रहा था। मैंने उसके आसूँ पीछे और गले से लगा लिया। अगर विषम परिस्थितियों में आप किसी को गले लगाते हैं तो साहस मिलती है।
ज्यादातर गाँव मे लड़के वाले के खाना खा लेने के बाद ही दूसरे लोग खाना खाते हैं, वहाँ भी ऐसे ही था।
मैंने अपने घड़ी पर नजर डाली ओ रात के 11:34 बजा रही थी। एक माता तुल्य औरत बोली बेटा खाना खा लिए। "नही माँ जी" मैने कहा। सायद ओ मुझे पहचान रही थीं, मेरी बेटी भी नही खाई है खाना खाने जा रहे हो तो इसे भी लेते जाओ न, ओ क्या है न कि रात ज्यादा हो गई है।
क्या परेशानी है यार , अब खुद तो खाया नही एक और को ले चलो खाना खिलाने।
क्या कर रही थी अब तक, मैंने गुस्से में पूछा
क्या?
कुछ नही, अब जल्दी भेजिए
अच्छा ! जा रही है।
ये क्या ये तो वही लड़की थी जिसने मुझे propose किया था, मैंने मन ही मन सासू माँ जी को धन्यवाद किया और हम दोनों चल दिए।
खाना खा कर आ रहे थे मगर हम दोनों को बस एक ही डर था कि कल सुबह हम लोग अलग हो जाएंगे।
आउच! उसका हाई हील सैंडल एक गढ़े में फस गया और ओ गिर ही रही थी कि मैंने उसे कमर में से पकड़ लिया। कुछ देर उसकी आँखों मे आँखे डाल कर देखा फिर अचानक याद आया कि ये शहर नही गाँव है सोनू बाबू किसी ने देख लिया तो लेने के देने पड़ जाएँगे
रात के 3:08 हो गए थे मगर नींद अब भी नही आ रही थी, बस एक ही डर सता रहा था, कल अलग हो जाएंगे। मगर आप रात को कितना भी जगे रहें पर सुबह में नींद लग ही जाती है सुबह नींद खुली तो 6:42 हो रहे थे।
ये क्या किए बेटा अब जल्दी से उठो नही तो उससे मुलाकात भी नहीं होगा,मैने मन ही मन कहा और जल्दी से दौड़ा बाहर आया तो पता चला कि दुल्हन बिदाई का रश्म तो कभी का हो गया है, और कुछ मेहमान भी चले गए हैं।
मैं भाग कर उसकी मां के पास गया, "आपकी बेटी कहाँ है" क्यों उसने सक्क भरी निगाहों से पूछा। "अरे ओ क्या है न कि कल रात को मुझे नींद आ रही थी इसलिए मैं बिना कुछ खाए जल्दी भाग आया तो पता नहीं जल्दी जल्दी में उसने कुछ खाया की नही"
"नही ऐसी बात नही है" उसने हँसते हुवे कहा, ओ तो बोल रही थी कि ठीक से खाना खा लिए । आज उसका exam था इस लिए ओ तो घर गई अपने भाई के साथ।
अब मेरे पास सिवाए आशुओँ के कुछ नही था न नाम, न पता और न ही कोई contact | उस दिन मुझे पहली बार प्यार हुवा था और पहली बार प्यार का दर्द भी। खैर सब भूल कर मैं भी पिता जी के साथ घर के लिए निकल गया कुछ दूरी पर एक bike पर एक लड़का एक लड़की को बैठा कर ले जा रहा था। उसे देख कर मुझे उस लड़की की याद आ गई, हम लोग की गाड़ी उस bike को overtake कर रही थी उसी समय मैने गाड़ी का काँच गिराया की ये क्या या तो सच मे वही लड़की थी ।जी कर रहा था कि अभी गाड़ी से उतर कर जा कर उसका हाथ थाम्भ लूँ मगर मैं बेबस था। उस समय मेरी आखिरी इच्छा यही थी कि एक बार सिर्फ एक बार पूछ लूं की
तुम्हारा नाम क्या है.........
तुम्हारा नाम क्या है.........

Us ladki ka nam pta. Chla ki nhi
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